हवाओं में जहर - भाग - 1

पुष्पराज पालीवाल

हवाओं में जहर - भाग - 1
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सारांश

आज 2 अप्रेल है वो रोज की तरह ही अपनी पुरानी मोटर साइकिल पर ऑफिस आ रहा था। हवा का कोई झोखा उसे रोक रहा था, रोक तो उसे पिछले कई दिनों से उसके मोबाइल के व्हाट्सएप पर आ रहे मैसेज भी रहे थे जिनमें लिखा ...
Devendra Kumar Mishra
बहुत ही सुंदर रचना। अब शहर मत जलने दो। रचना के लिए बधाई। मेरी भी रचनाओँ की समीक्षा करें।
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शिव प्रसाद पालीवाल
पुष्पराज पहली बार तुम्हारी रचनाएँ पढ़ रहा हूँ । भाषा और भाव दोनों की प्रस्तुति बहुत अच्छी है । तुम्हारी सृजनशीलता में उज्ज्वल संभावना है । हार्दिक शुभकामनाएं ।
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Rishabh Shukla
nice
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और्व विशाल
बढिया विषय
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Jyoti Bharti
nice
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