हवाओं का फ़रमान

शुचिता त्रिपाठी

हवाओं का फ़रमान
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सारांश

ऐ हवा तेरा रूख क्यों बदला सा लग रहा थोड़ा हौले हौले चल तू , यूँ मेरी बेचैनी न बढ़ा तू , उनकी सलामती के कशीदे गढ़ तू , उनको फरमान मेरा दे देना तू वो खनक ,वो रंगीनियाँ पूरे फलक फ़ैली अजीब तन्हाइयाँ , अब ...
Ashutosh Trivedi
very nice,... ashu.Trivedi pilibhit(u.p)
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