हल और बैल

संजीव जायसवाल ' संजय '

हल और बैल
(47)
पाठक संख्या − 10368
पढ़िए

सारांश

हल और बैल किसान का खेत जोतते. बढ़िया फसल होती. एक दिन दोनों में बहस हो गयी की वो ज्यादा खेत जोतते हैं. किसान ने पहले बैलों को हल को खेत में पहुंचा दिया और बोला चलो खेत जोट कर दिखाओ. बैलों ने खूब दौड़ लगाई. फिर किसान हल को खेत ले गया और बोला चलो अब तुम खेत जोतो. दोनों ने कितना खेत जोता और कौन जीता ?
Shobha Berry
Eakta mey hi bal h good story
Manish Mishra
एकता में शक्ति।
Devbrat Prasad
एकता में ही सबका विकास है
DrDiwakar Sharma
सच है.एकता में बल है।
Sudhir Bajpai
सुन्दर रचना
Sudha Jugran
सही है। हल और बैल एक दूसरे के पूरक हैं । और ये बात कई मायनों में समझने वाली है। पर "झगड़ा " आप सब के बीच करवा देते हैं पहले। फिर चाहे वह हल और बैल हों या फिर सोशल मीडिया के विभिन्न चैनल (सोशल मीडिया के राजकुमार) और ऐसी ही एक कहानी मैंने और भी पढ़ी थी, शायद रिमोट को लेकर थी। नाम याद नहीं आ रहा इस समय । वहां भी "झगड़ा " ही था। बिना झगड़े के निष्कर्ष निकलना भी तो मुश्किल है । इसीलिए झगड़ा जरूरी है । बहुत अच्छी कहानी संजीव जी । आपकी कहानियाँ तर्क करने पर मजबूर कर देती हैं ।
रिप्लाय
Prachi Sharma
👌👌👌👌
रिप्लाय
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.