हरे काँच की चूड़ियाँ

पूनम टंक

हरे काँच की चूड़ियाँ
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सारांश

सुबह-सुबह माँ आयी और अपनी दस वर्षीय बेटी गौरी को जगाने लगा। माँ बोली .............. ‘‘गौरी उठ ना बेटा, फिर वो गौरी का माथा सहलाते हुए बोली आज तो मेरी बेटी की शादी है और वो अभी तक सो रही है।’’ अनायास ...
Mala Arya
बहुत ही सुन्दर कहानी
Sharad Rai Shishu
बहुत अच्छी
Rehan Aabid Ali Kazmi
कहानी का अंत सुखद हुआ, अच्छी कहानी है
Pratibha Awasthi
बहुत सुन्दर रचना
Praakash Rishabh
Accha kahani par aaj kal aisa hota kaha hai.
Preeti Ajmani
khani bahut Aachi hai
Tara Ramchandani
बहुत अच्‍छी
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