स्लीपर क्लास पत्नी, फर्स्ट ए.सी. पति

मोहित शर्मा ज़हन

स्लीपर क्लास पत्नी, फर्स्ट ए.सी. पति
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सारांश

चरणप्रीत ने गहरी सांस ली और बोला। "थैंक यू भाई, मुझे लगा यह बोझ हमेशा दिल में ही रह जाएगा। अच्छा लगा तूने इतना ध्यान दिया। कभी कोई सीरियल, एड या किताब में देखना अरेंज मैरिज केवल लड़कियों की समस्या की तरह दिखाई जाती है...जैसे हम लड़को को तो सब मनमुताबिक मिल जाता है, कोई समझौता नहीं करना पड़ता। जब मेरी शादी हुई तब मैं तैयार नहीं था पर घरवालो को समझाना मुश्किल हो रहा था। मैं कुछ समय और बिना ज़िम्मेदारी के पढ़ना चाहता था, कुछ बेहतर करना चाहता था पर किसी को मेरी बात समझ नहीं आयी? तो मेरी औकात के हिसाब से शादी हो गई। जैसे मान ले मैं तब रेलवे का 'स्लीपर क्लास' डब्बा था और मेरी औकात के अनुसार एक 'स्लीपर क्लास' टाइप लड़की से मेरी शादी हुई। समय के साथ धूप में खाल जलाकर, धुएं से धुँधले हुए शहर में अपने फेफड़े ख़राब कर, बीमारियां पालकर मैंने बिज़नस बनाया और आज मैं स्लीपर क्लास की औकात से ऊपर आकर 'फर्स्ट क्लास ए.सी.' डब्बा बन गया पर मेरी पत्नी तो स्लीपर क्लास ही रही ना, जब उसने स्लीपर का टिकेट लेकर मुझसे शादी की तो उसे किसलिए मैं फर्स्ट ए.सी. में सफर कराऊँ?"
Manish Tak
बहुत बढ़िया
रमेश कुमार
कहानी का शीर्षक बदलें, यह गुज़ारिश है,सब एक ही पिता की संतान है
Amit Mishra
खूबसूरत सन्देश
pinaki banerjee
कुछ भी लिख लिए
Ankurish Gupta
Every husband should give a lot of importance and love to his wife
Prakash
nice 💓 touching story 👏👏😊
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