स्पर्श

डॉ. लवलेश दत्त

स्पर्श
(88)
पाठक संख्या − 11089
पढ़िए

सारांश

“दीप्ति...यह सब क्या बकवास है?” तौलिये से मुँह पोंछते और कमरे में प्रवेश करते हुए माँ ने पूछा। “क्यों...अब क्या किया मैंने?” दृष्टि लैपटाप पर ही जमाए हुए दीप्ति ने पलटकर पूछा। अपनी त्योरियाँ चढ़ाए ...
Avni Kaushik
bhut acha concept h aur achi story, maine bhi ase hi concept pr story likhi h smbhav ho to jrur padhna. story ka naam h "hmare pyar ko smjho"
Nirupa Verma
मान सर आपको ,सत सत प्रणाम ,,
ब्रजेंद्रनाथ मिश्रा
आदरणीय लवलेश जी, स्त्री - मन की सहजता से उत्पन्न उसके जीवन की जटिल बनाने वाले कारकों की बहुत अच्छी अभिव्यक्ति इस कहानी में हुई है। एक अच्छी कहानी के ताने बाने में प्रवाहमयता का भी अच्छा निर्वाह दिखता है। साधुवाद! इसी साइट पर आप मेरी रचनाएँ भी पढ़ें, और अपने विचार दें। मेरी हाल में प्रकाशित ऐतिहासिक फिक्सन पर आधारित कहानी "प्रतिशोध का पुरस्कार"अवश्य पढ़ें और अपने विचार दें। मेरी कविता संग्रह "कौंध" में अमेज़न Kindle पर प्रकाशित हुयी है, जिसे इस लिंक पर जाकर डाऊनलोड कर पढ़ा जा सकता है। Link: https://aman.to/ 2KdRnSP आप इसी साइट पर मेरी अन्य रचनाएँ भी पढ़ें और अपने विचार दें। आप marmagyanet.blogspot.com पर मेरा ब्लॉग विजिट करें और मेरे रचना संसार से अवगत होकर अपने विचार दें। मेरा एक उपन्यास "डिवाइडर पर कॉलेज जंक्शन" Amazon के इस लिंक पर ऑनलाइन खरीद के लिए उपलब्ध बै। इसे आप ₹93*₹40 डिलीवरी चार्ज देकर अपने घर मँगवा सकते हैं। link: https://amzn.to/2KdRnSP मेरा लिखा कहानी संग्रह "छाँव का सुख" अमेज़न किंडल पर ई बुक के रूप में इस लिंक पर उपलब्ध है: छाँव का सुख (Hindi Edition) https://amzn.to/2IboioB किंडल पर ई बुक को इसतरह डाऊनलोड करें: ऊपर दिए गए लिंक पर आप क्लिक करेंगें तो आपको अमेज़ॉन के किंडल डायरेक्ट पब्लिशिंग के साइट पर ले जाएगा। वहाँ आप "Buy now with one click"पर जैसे ही क्लिक करेंगें, आपको पेमेंट ऑप्शन पर स्क्रीन खुलेगा। आप अपने क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, या वालेट जैसे paytm, फ़ोनपे या bheem app से भी ₹69 या विदेशी मुद्रा में $1 पेमेंट कर डाऊनलोड कर सकते हैं। (कहानी संग्रह "छाँव का सुख" के लिए या राशि ₹50 है) इसके लिए आप अमेज़न का किंडल app डाउनलोड कर लें। डाउन लोड होते ही किंडल अप्प पर read now पर क्लिक करें और पूरी किताब कभी भी पढ़ें, हमेशा के लिए। आप यूट्यूब के मेरे channel : marmagya net पर जाकर मेरी रचनाओं के ओडियो और वीडियो को देखें, लाइक करें और subscribe भी करें। Facebook link: https://m.facebook.com/public/Brajendranath-Mishra Twitter link: Take a look at BRAJENDRA NATH MISHR (@bnmish): https://twitter.com/bnmish?s=09 सादर आभार ब्रजेंद्रनाथ
Aslam Khan
लवकेश जी आपको बहुत बहुत मुबारकबाद आपने एक ज्वलंत मुद्दे पर बेहतरीन कहानी लिखी है।पुरुषवादी मानसिकता खासतौर पर भारतीय समाज में ये स्वीकार्य नही है कानूनी रूप से मान्यता मिलने के बाद भी इसे स्वीकार करने में वक़्त लगेगा।और ये बहुत हद तक सच है कि पुरूष नारी की कोमलता का ख्याल नहीं करता है उसे वो सिर्फ एक जिस्म दिखता है जिससे वो अपनी शारीरिक भूख मिटा सकें।इससे ज्यादा और कुछ भी नहीं। आपकी लेखन शैली बहुत ही बढ़िया है शब्दों पर अच्छी पकड़ है।मेरी शुभकामनाएं।
Parkash Bajaj
पढने के लिए बहुत ही अच्छी है लेकिन व्यवहार मे सही नहीं है पुरुषों के लिए बहुत ही विरोधी है
रिप्लाय
Vivek Singh
nice story, dipti ka uski MAA ki history dekhate hue guess hona natural tha, but it doesn't mean ki she should be lesbian , agar sabhi aise karne lage to will not be dishonour of nature rules, than how the life cycle will go ahead
रिप्लाय
Anand Joshi
डॉ लवलेस क्या आपको पूरी जाति से नफरत है जिस स्टोरी में आपने पूरी जाति का अपमान किया है के के हर पुरुष को एक ही नजर से देखना गलत है अगर पुरुष होते तो वो लड़की का किरदार में दो बार जिंदगी में झटका खा चुकी है सबके साथ ऐसा नहीं होता उसका जन्म भी अगर पुरुष ना होता है तो इस धरती पर उसने जन्म नहीं लिया रहता तो जिंदगी में सभी पुरुष को एक ही चश्मे से देखना योग्य नहीं इस बात का आपको अंदाजा होना चाहिए समाज में दोनों ही घटक है नहीं तो पृथ्वी पर लोकसंख्या बड़ी ही नहीं रहती
रिप्लाय
सोनम त्रिवेदी
nice story sir bas kisi aadmi se shadi na karne aur apne lesbian hone k sandarf me dipti ne jo purusho ko pata nhi kya kya kaha wo i think kuchh jyda he ho gaya
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.