स्त्री ,तू सबसे बड़ी अछूत !

रंजना जायसवाल

स्त्री ,तू सबसे बड़ी अछूत !
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सारांश

‘तू अछूत है मेरे घर मत आना ...|’ --आखिर तूने खानदान की नाक कटा दी न ....| ‘’मुझे तो पहले से मालूम था ये लड़की कोई न कोई गुल खिलाएगी |’’ ‘अरे,किया भी तो कहाँ...कोई ढंग का लड़का नहीं मिला क्या इसे ...?’ ...
Archana Shrivastava
samaj ka sateek varnan.shadi ka nirnay bhuy soch samaj kar lena chahiya samaj me kre ya dusre samaj me.keemat to lady he chukayegi.samaj me karne per mayke wale sath rhte he.
ajaykumar mishra
जाति से ऊपर उठकर सोचने की जरुरत है
deepali tiwari
समाज में नारी का सही चित्रण
Nidhi Vyas
संवेदनशील कहानी
Usha Garg
काफी सही कहा है
Dinesh Gilra
बहुत अच्छी कहानी
Swarnima Sinha
स्त्री की ब्यथा की सटीक बर्नन
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