स्त्री ,तू सबसे बड़ी अछूत !

रंजना जायसवाल

स्त्री ,तू सबसे बड़ी अछूत !
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सारांश

‘तू अछूत है मेरे घर मत आना ...|’ --आखिर तूने खानदान की नाक कटा दी न ....| ‘’मुझे तो पहले से मालूम था ये लड़की कोई न कोई गुल खिलाएगी |’’ ‘अरे,किया भी तो कहाँ...कोई ढंग का लड़का नहीं मिला क्या इसे ...?’ ...
Geeta (Garima) Pandey
समाज में स्त्री की दशा पर बहुत अच्छी तरह ध्यान आकर्षित किया है आपने। इसके लिए आप धन्यवाद और बधाई स्वीकार करें। साथ ही आपका मार्गदर्शन हमें मिले, ऐसी कामना है।
Rajneesh Rai
ladki ka 1 galat nirnay puri zindgi tabah kar deta hai, ye kahani un ladkiyo ke liye hai jo ma bap se door hokar sadi kar leti he fir kahi ki nahi rehti,
Usha Joshi
स्त्री का इतना तिरस्कार करने वाले पुरुष को तुरन्तत्याग देना चाहिए।जब कि स्त्री खुद सक्षम है ।
Kshama Shandilya
Bahot vyavharik katha likhi hai aapney.
Upasna Jain
bahut badiya likha hai aapne.
Gyanendra maddheshia Gyani
बेहद शानदार और उम्दा रचना मैम।वाक्य अनुवाद यथानुकूल रहे..पढ़ते हुए ऐसे लगा जैसे कि दृश्य आँखो के समीप ही चल रहा हो।रचना उत्कृष्ट है और ये आपकी रचनात्मक क्षमता को परिभाषित करता है...स्त्री की संवेदना का बेहद भावनात्मक पक्ष पेश किया है आपने
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Rucha Dingiya
बेहद सटीक चित्रण आज भी महिलाये ऐसे स्तट्स में जिंदगी गुजरती है ..... सोच को बदलना3 कीशक्ति होनी चाहिए
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