स्त्री कैद रहना चहती हैं

Sanjukta Pandey

स्त्री कैद रहना चहती हैं
(7)
पाठक संख्या − 178
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सारांश

स्त्री कैद रहना चाहती हैं किसी के आखोँ मे किसी के सपने मे किसी के रचनाओँ मे..... किसी के दिल मे... किसी के घर मे... कैद मे भी वो खुश रहती हैं.. क्योंकि वह कैद रहना ही चाहती हैं....सदियों से सदियों ...
Kalyani Jha
बहुत खूब 👌👌बहुत सुंदर रचना
Vidya Sharma
bhut khoob....sundr rachna.plz ise or vistar de
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अचलेश सिंह
अच्छा लिखा है आपने।
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सौरभ शर्मा
सही में, वो आजाद नहीं होना चाहती
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