सो सैड

अंजुलिका चावला

सो सैड
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सारांश

"नेहा की राखी पर तीन दिन की छुट्टियां मंज़ूर थीं पर वो उससे पहले ही भाग गई" "सब मैम से मिलीभगत होगी हमारे भी तो भाई हैं ,मायका है, हमारी भी इच्छा होती है जाएं हुंह" स्टाफ रूम की काना फूसी प्रिंसिपल तक ...
Chhaya Srivastava
उत्तम रचना
Poorni tiwari
heart touching story keep it up 🤗
Manavprem
aaj mujhe ek achchi writer ki lajawab rachnayein padne ko mili hain
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अंशु शर्मा
👌👌👌👌
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Raj Jodha
achchi lagi
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प्रभु दयाल मंढइया
माननीया सुश्री अंजुलिका चावला जी,घायल की गत घायल जाने और न जाने कोय।सरहद पर शहीद होने वाला जवान हमारा अपना न होते हुए भी हमारे दिल को झकझोर जाता है।हमें ऐसा अनुभव होता है कि वह हमारा अपना था।एक बार तो आँखें नम हो जाती हैं।इस कहानी में वही दर्द झलकता है।दिल को छूने वाली रचना के लिए आपको बधाई और साधुवाद।
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Vibha Mishra
bitter truth of our society
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Ankit Jaiswal
यथार्थ रचना
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sushant Srivastava
हमारी मरती संवेदनाओ की कहानी
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Vipin Kaushik
Very good
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