सोशल नेटवर्किंग साइट्स और युवा-वर्ग

केशव मोहन पाण्डेय

सोशल नेटवर्किंग साइट्स और युवा-वर्ग
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सारांश

सोशल नेटवर्किंग साइट्स युवाओं की जिंदगी का एक अहम अंग बन गया है। यह सही है कि इसके माध्यम से लोग अपनी बात बिना किसी रोक-टोक के देश और दुनिया के हर कोने तक पहुँचा सकते हैं, परन्तु इससे अपराधों में भी वृद्धि हुई है।
मनीषा सहाय
बहुत बेहतरीन लेख है।सोशल मिडीयी समाज मे अनेक समस्याओं को जन्म दिया है, बहुत से लोग इसके शिकार हुए है। मेरी कहानी पिता के अवशेष जरूर पढ़ें और अपनी समीक्षा दे
सतनाम सिंह
बहुत ही सुंदर लेख... 😍😍😍
Ashish Pathak
पांडेय जी! आप ने अपने लेख में बहुत सही बातों को उल्लेख किया है।बाँकी सब ठीक है लेकिन इन माध्यमों के कारण कहीं न कहीं हम अपनी वास्तविक पहचान भूलते जा रहे है।सम्बन्धों मे वह प्रेमानुराग जो कुछ दशक पहले हुआ करता था शनैः शनैः क्षीण होता जा रहा है।इस के अलावा भी इसके कई साइड इफेक्ट है जिनसे मानवीय जीवन के विभिन्न आयामों में असंतुलन पैदा हुआ है।पर जैसा आप नें अपने लेख में कहा है-समय ,जीवन परिवर्तनशील है,हमें उन परिवर्तनों के साथ सम्यक तरीके से गति करना चाहिए।...धन्यवाद!
दीपिका पाण्डेय
उत्तम विचारों का समावेश सराहनीय है।।🙂🙏
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