सोनमछरी

गीताश्री

सोनमछरी
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सारांश

“रूम्पा दीदी... ओ रूम्पा दीदी... दरवाजा खोलो... तुम्हारे लिए संदेशा आया है...।“ मन में कुछ बेचैनी सी थी। सुबह से कुछ भी भला नहीं लग रहा था। रूम्पा ने यह हकार सुनी, कोई उत्साह न हुआ “कि होच्छे?” सवाल ...
संतोष सुधाकर
स्त्री मन की दुविधा को दर्शाती सुन्दर रचना 👌👍
नैना साहू
बेहतरीन रचना
Usha Garg
ओह गवई परिवेश में अच्छी कहानी
Mahesh Amde
बहुत ही बेहतरीन कहानी ।
Keya Jaisal
aanchalikta ko apne khubsoorti se priya hai.
Pooja Yadav
बेहतरीन कहानी
Renu Rai
today read again a very good story
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