सुरंग के उस पार

अशोक गुप्ता

सुरंग के उस पार
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सारांश

रेलगाड़ी जैसे रुकने की तैयारी करने लगी. बारिश भी करीब करीब रुक चुकी थी. बस, जिस सिलसिले पर रुकने के संकेत नहीं थे, वह था आदित्य का रोना. न सिसकी, न क्रंदन, बस आँख से बहते आंसू और चेहरे पर ठहरी हुई ...
Rashmi Singh
मर्मस्पर्शी रचना।दिल के करीब
राजेश सिन्हा
जबरदस्त । मन को छू लेने वाली कहानी है ये।
Nidhi Vyas
bahut sundar rachna.
Puneet Sharma
Bhut खूब..bhut acha likha aapne😊👍 aage bhi likhte rahe....intzaar rahega🤗
Rajni Gupta
👏👏👏👏👏
Archana Varshney
बहुत अच्छी
कुसुमाकर दुबे
बहुत अच्छी कहानी।
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