सुरंग के उस पार

अशोक गुप्ता

सुरंग के उस पार
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सारांश

रेलगाड़ी जैसे रुकने की तैयारी करने लगी. बारिश भी करीब करीब रुक चुकी थी. बस, जिस सिलसिले पर रुकने के संकेत नहीं थे, वह था आदित्य का रोना. न सिसकी, न क्रंदन, बस आँख से बहते आंसू और चेहरे पर ठहरी हुई ...
Puneet Sharma
Bhut खूब..bhut acha likha aapne😊👍 aage bhi likhte rahe....intzaar rahega🤗
Rajni Gupta
👏👏👏👏👏
Archana Varshney
बहुत अच्छी
कुसुमाकर दुबे
बहुत अच्छी कहानी।
Pooja Yadav
बहुत ही मर्मस्पर्शी
Rupam
कभी कभी हम शब्द नही खोज पाते है,आपकी यह रचना अनोखी है जो नारी के हर रूप को दिखाती है।
Meenakshi Gupta
शब्द नहीं हैं ये बताने के लिए कि नारी संघर्ष की ये कहानी कितनी अच्छी लगी
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