सुन्दरियों का ‘होमकमिंग’

जितेन्द्र 'जीतू'

सुन्दरियों का ‘होमकमिंग’
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सारांश

सुन्दरियाँ, जो जीतने गयीं थी, जीतकर वापिस आ रहीं हैं। पुरूष पलके बिछाये बैठे हैं। स्त्रियाँ आँचल फैलाए बैठीं है। बेसब्री से प्रतीक्षा की जा रही है। सब्र का पैमाना छलका जा रहा है। कारण है, सुन्दरियाँ ...
Vimalkumar Jain
सिर पर से निकल गई
Om Shankar
आपकी शैली प्रभावी ,और सन्दर्भ सटीक है , साधुवाद!
Khan Waris
sarcasm level infinity
nidhi Bansal
सन्दर्भ समझ नहीं आया किन्तु व्यगांत्मक शैली असरदार है।
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Alok Kumar
सरल, सहज, सटीक लेखन . . . बधाई!
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Indra Kilam
तीखा व्यंग्य .पैने शब्द. सशक्त अभिव्यक्ति
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