सुजाता

मंजू सिंह

सुजाता
(239)
पाठक संख्या − 10605
पढ़िए

सारांश

मुसीबत के समय सब साथ छोड़ देते हैं लेकिन सुजाता ने पति की मृत्यु के बाद अपने बच्चों को पालन के लिए किसी से मदद लेने की बजाय खुद ही हिम्मत की | ईश्वर ने भी उसका साथ दिया | उसकी बेटी मीता ने छोटी सी उम्र में समझदारी दिखते हुए अपनी माँ का साथ दिया तो सुजाता अपनी परवरिश पर धन्य हो गयी | सुजाता ने हालत के आगे कभी हार नहीं मानी और अंत में मुसीबतें हार ही गयीं |
नीता राठौर
बहुत भेड़िये हैं इस दुनिया मे। जो हर लड़की को नोच खाने को हमेशा तैयार रहते हैं। अच्छी कहानी।
Mamta Upadhyay
खूबसूरत
Reena singh
उत्साह वर्धक कहानी ।
Raj Rani
Bahut bahut acche prarnadayak story . Problems mai ghutne takene ki jagah unka samna karna chahiye.
Mithilesh Kumari
परिस्थिति से समझोता न कर, आगे बढ़कर कुछ कर लेने का संकल्प भविष्य को उजागर बना देता है मीता की मां का साहस इस कहानी में हमें प्रेरित किया है।
Beena Tewari Bisht
माता पिता के रहते भी मजबू री का फायदा उठाने वाले बहुत हैं समाज में लोग ! कहानी आस पास का आइना है !
Dr Deepayan Choudhury
संघर्ष का जीवंत चित्रण , साधुवाद
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.