सीढ़ियाँ

कमल कुमार

सीढ़ियाँ
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Sudha Ramavat
अगर कोई वजनदार और ईमानदार ,राष्ट्वादी इस कहानी को सही जगह पहुचाने का कम कर दे ,तो बड़ा अच्छा हो।
रूबी
न ओर न छोर, क्या कहानी है ये????
मनमोहन कौशिक
समस्याएं हैं तो इनके हल भी हैं,मुट्ठी भर स्वार्थी लोग एक जुट हैं,किंतु शेष लोग संख्या में अधिक होते हुए भी हर स्तर पर पिट रहे हैं,इसलिए कि वे उनके खिलाफ एक जुट नही हैं, समाज को एक जुट और जाग्रत समाज बनाने के सतत निस्वार्थ प्रयास करने होंगे।जाति धर्म क्षेत्र भाषा गरीब पिछड़ों में बंटा हुआ निर्बल समाज ही तो उनकी शक्ति है वे उसे अपनी सत्ता के लिए कभी क्यों होने देंगे।व्यस्था से निराश लेखक जति वादी सोच के साथ दोषारोपण कर शांत हो गया।उसकी यह सोच इसे एक कमज़ोर कहानी बनाती है।
Amit Mishra
हिला देने वाली झकझोर देने वाली कहानी
Sarla Rathor
देश और समाज की सच्चाई को आइना दिखाती है यह कहानी
kavita
kavita
very good story samaj ki sari problem dikhati h ye story
urmila
हमारे देश की यथार्थता से परिचय
रश्मि सिन्हा
बेहतरीन ,सच्ची को दिखाती कहानी
hindi@pratilipi.com
080 41710149
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