सियाह लहरें

कांता रॉय

सियाह लहरें
(16)
पाठक संख्या − 1247
पढ़िए

सारांश

यह मेरा भ्रम था या .... नहीं , तो और क्या था ? लेकिन पनियाई आँखों में दर्द की लहर का सच, जो एकदम से उठते-उठते-से तुरंत शांत हो गई थी। असहाय-सा अपने मन को डूबता हुआ महसूस किया मैंने।
प्रेरणा गुप्ता
आदरणीया कांता जी, आपका लेखन पढकर लगता है, सामने से सब गुजर गया। बहुत सुंदर। हार्दिक बधाई आपको।
आशीष कुमार त्रिवेदी
सियाह लहरें चिंता की सियाह लहरें तिल तिल मारती हैं.
रिप्लाय
कल्पना भट्ट
बहुत बढ़िया | मुझे पसंद आयी आपकी ये कहानी |saadar
रिप्लाय
Pawan Jain
परिवार की धुरी को कुछ हो जाये तो सारी दुनिया लुटती सी दिखाई देती है, और जरा सी आहट भी कुशंकाऔ से भर देती है ।सियाह लहरें में कांता राय जी ने सजीव चित्रण किया है ।कहानी अंत तक पाठक को बांधे रखने में सक्षम है ।शुभकामनाएँ एवं बधाइयाँ ।
रिप्लाय
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.