साज़िश

अमित पाण्डेय

साज़िश
(199)
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सारांश

जय मां सरस्वती साजिश 1 अविनाश अपनी साई डिटैक्टिव एजन्सि के केबिन में बैठा कुछ काम कर रहा है।तब तक राजू प्रवेश करता है। “चलिए सर आज शाम को सराय रानी ढाबा मे खाना खाकर आते है। आज बाहर खाने की इच्छा हो ...
sumit kumar's
awesome I like it 👍👍👍👍
Hari Lal
sar aapne eas kahani ko bohot achchi likhi hai par eas kahani ka pehla baga konsa hai ye, TUdne me tore pareshaani hoi please sar aagli kahani ke bato ko ease likhi ye jesa pat jale ye kahani ka pehla baga hai 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🤝😇😇😇😇😇😇
कुसुमाकर दुबे
बहुत बढ़िया कहानी।
Aradhya
superb suspenseful story...
Veena Yadav
बढ़िया कहानी है।
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