साला ! गधा !

ओमप्रकाश क्षत्रिय

साला ! गधा !
(26)
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सारांश

''कहां है साहब ?'' उस ने कार्यालय में घुसते ही बाबू से पूछा. '' अरे भाई ! क्या हुआ ? बैठोबैठो. बताता हूं,'' कह कर बाबू ने चपरासी को आवाज दी, '' रतन ! पानी लाना.'' मगर, उस ने बोलना जारी रखा, '' अरे ...
Mukesh Verma
सही काम करने बाले को कोई नहीं पूछता।चापलूस बिना काम किये तारीफ पाते है।अधिकारी कर्मठ कर्मचारी को फंसाकार रिश्वत लेते है। उत्तम रचना
Prashant Saini
jabardast
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माही मिश्रा
bht acha
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mukesh nagar
बहुत बढ़ियां लिखा सर, सच्चाई को बयां करती उम्दा रचना।🙏
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साहिल
nice
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डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा
बहुत ही बोरिंग सिस्टम पर एक अच्छी लघुकथा।
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Akhlaq Beg
बहुत अच्छी कहानी है।
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बी के दीक्षित
यथार्थ चित्रण
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