साबिया का ब्याह

किशोर श्रीवास्तव

साबिया का ब्याह
(81)
पाठक संख्या − 5518
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सारांश

मैं ट्रेन से उतरकर भीड़ के साथ प्लेटफार्म के बाहर आ गया था। बाहर, ‘बाबूजी कहाँ जाना है’, ‘बाबूजी कहाँ जाना है?’ का शोर करते हुए कई रिक्शे-तांगे वाले मेरे इर्द-गिर्द इकट्ठे हो गए थे। इस शोर-गुल के बीच ...
Prajapati Mahes
bahut, badeya.he.kahhane
shakun gautam
अच्छी कहानी है लेकिन अधूरी लगती है
Sunil Kumar Varma
bahut acha hai bhai aur likha karo es kahani par film banani chahiye
Prashant B.
Excellent.
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Suryaa Shukla
😢😢
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tuktuk
very nice
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Puneeta Singh
bahut achhi kahani .....Dil Ko chhoo Lene wali
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Chetan Sood
ending Sahi nahi
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akansha
heart touching , very nice , selection of words are fabulous
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