सात जन्म का साथी

कविता जयन्त श्रीवास्तव

सात जन्म का साथी
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सारांश

"अरे ज्योति तू ? " वर्षों बाद अपनी ससुराल की एकमात्र प्यारी सखी , और मोहल्ले की मुंहबोली ननद को, मॉल में देख कर मैं खुशी से चीख उठी "हां भाभी मैं ! मुस्कुराती हुई बोली ..थोड़ा बदन भर आया था और चेहरे ...
Shiv kumar Gupta
bhut achi kahani h very inspiring n provoking
Saraswati Mishra
लाजवाब कहानी
pramod morya
heart touching story
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