साँझ की व्यथा

प्रेरणा गुप्ता

साँझ की व्यथा
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सारांश

बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं, जो किसी की वृद्धावस्था की पीड़ा को महसूस नहीं कर पाते | जिन लोगों के बच्चे उनसे दूर रहते हैं, अपनी रोजी रोटी की खातिर या अन्य किन्हीं कारणों वश | ऐसे में वृद्ध माता-पिता किस तरह से अपना समय काटते हैं? यही मैं अपनी रचना के माध्यम से दर्शाना चाहती हूँ |
Aruna Anand
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति !
Sarabjeet kaur
Hume aapno bacho ko sirf achi Education he nhi, aur v bhot kuch dena chahiye, unhe dharm k bare batana chahiye, spiritual bnna chahiye, paisa aur career he sb kuch nhi hota, hum sirf unhe paisa kamane, aur modern banane ki hod me lga dete h.
Ruby Modi
akelapan kya hota h ..yhi h
Akhilesh Agnihotri
बहुत सुंदर......
Arvind Mandloi
आधुनिक जीवन शैली में बदलती भावनाओं को रेखांकित करती बढ़िया लघुकथा है।
अनुश्री त्रिपाठी मिश्रा
जीवन की अंतिम घड़ियों के अकेलेपन की व्यथा का सजीव चित्रण।
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