ससुरालनामा

जितेन्द्र 'जीतू'

ससुरालनामा
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सारांश

ससुराल, दामादों की खूबसूरत शरणस्थली है। जब बीवी, चैके-बर्तन से ऊबकर मायके कूच करती है तो समझदार पति ससुराल की शरण लेता है। विश्व में शायद ही कोई जीवित पति हो, जिसकी ससुराल न होती हो। कई बार तो ऐसे ...
Nitin Singh Bhandari
sir medam na pad le ye apki hui rachna👌👌👌
Manoj Kumar Srivastava
ससुर तो सास का पति होता है और अपने मायके में रहता है अतः दामाद जी की सहानुभूति का पात्र होता है---दामाद जी के बहाने उसको भी पकवान मिल जाते हैं
mummy papa
bahut interesting story
दिनेश कुमार पाण्डेय
वाह जीतू भाई कमाल का लेखन।
Punit Garg
सुंदर ऐसी और रचनायें दे
Rahul Goswami
बहुत बढ़िया वर्णन
neha
बहुत sunder वर्णन
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