समाज के भेड़िये

वेदिका ®

समाज के भेड़िये
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सारांश

घर के बाहर अकेली खेल रही वंशिका को देख कर पड़ौस में रहने वाले सत्या ने मुस्कुरा कर पूछा " आज स्कूल नहीं गयी वंशी? वंशी ने भी चहकते हुए जवाब दिया "नहीं भैया, पता है आज बड़े बच्चे टूर पर गये हैं इसलिये ...
Vaani Ji
lanat hai aise ghatiya aur auchi mansikta wale bhediye par mera bus chale tu ek gadasa lekar aise suwar ka gala kat dun..rishton ko bhi sharamsar karte hain aise pigs....👿
बरकत 'सहरा'
ये महज़ एक कहानी नहीं बल्कि आज के समाज की दरिंदगी की सच्चाई है।😢😢😢😢😢
Shaline Gupta
जो लिखा है दरद देता हैं शायद यही कारण है लोग बेटियों को जन्म ही नही लेने देते।
nafis
बहुत ही मार्मिक कहानी सच्ची भी है
Sadhana Bahuguna
ऐसी घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं, समाज किधर जा रहा है, बुद्धिजीवियों को सोचना चाहिए
Monika Jadhav
aj kal kisi per bharosa nahi kar skte
Priya
एक बात बोलना चाहूंगी इस कहानी को पढ़ने के बाद की इस पर किसी भी समीक्षा की आवश्यकता नहीं है। अच्छा हुआ आप ने उसके रैप को ज्यादा describe नहीं किया वरना अच्छे लोगो की नींद हराम हो जाती।
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Devendra Kumar Mishra
इन हैवानों को भी कोई चॉकलेट की कीमत क्यो अदा नही करवा पाता।
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