समय

Preeti Chauhan

समय
(10)
पाठक संख्या − 89
पढ़िए

सारांश

समय की अपनी गति है, अपनी चाल है.. अपनी हसरतों के बोझ से बोझिल सारा जहाँ बेहाल है.. अंजान_है_कहाँ_होगी_मंज़िल अपनी.. खामोश_रस्तों_में_हज़ारों_सवाल_हैं... ...
Pawan Kumar
अच्छी कविता
रिप्लाय
Pawan Pandey
बहुत ही अच्छी रचना।
नृपेन्द्र शर्मा
बहुत सही बात है
रिप्लाय
विजय कुमार बोहरा
nice poem....pls visit https://mujhekuchkrnahai.blogspot.com for my poems
रिप्लाय
neetu singh
Very nice
रिप्लाय
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.