समय

Preeti Chauhan

समय
(12)
पाठक संख्या − 102
पढ़िए

सारांश

समय की अपनी गति है, अपनी चाल है.. अपनी हसरतों के बोझ से बोझिल सारा जहाँ बेहाल है.. अंजान_है_कहाँ_होगी_मंज़िल अपनी.. खामोश_रस्तों_में_हज़ारों_सवाल_हैं... ...
हेमंत यादव
बहुत खूब
रिप्लाय
Pandey Sarita
बहुत खूब अभिव्यक्ति
रिप्लाय
Puneet Dhiman
अद्भुत
रिप्लाय
Pawan Kumar
अच्छी कविता
रिप्लाय
Pawan Pandey
बहुत ही अच्छी रचना।
नृपेन्द्र शर्मा
बहुत सही बात है
रिप्लाय
विजय कुमार बोहरा
nice poem....pls visit https://mujhekuchkrnahai.blogspot.com for my poems
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.