समझौता!

डॉ.अनुराधा शर्मा

समझौता!
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सारांश

"यदि मैं ऐसा ना करती तो स्थिति और भी ज्यादा खराब होती ..।" चिन्तित सी नीरा ने वन्दना से कहा। "हाँ नीरा ! तुमने जो किया ठीक ही किया । जो भुगतता है वही जानता है .. दुनिया का क्या .. ? दुनिया तो हर हाल ...
Hemant MOdh
बहुत ही संवेनशीलता से भरपूर रचना, आपके लेखन में गहरी संवेदना महसूस होती हैं! हार्दिक शुभकामनाएं, अभिवादन..! हेमन्त मोढ़
Anuj Sonwani
बहुत अच्छा..!
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नृपेन्द्र शर्मा
सुंदर,,, बड़ी जीवन के अनेक रंग प्रस्तुत कर दिए आपने।
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Jyotiswarup Agrawal
अच्छी कहानी है! स्त्री की अस्मिता को सुंदरता जे व्यक्त किया गया है!
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ज्योति मिश्रा
बेहतरीन
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Meera Sajwan
बहुत उम्दा रचना ,साधुवाद ।
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Ajit
Shabdon Ka jaal achha buna hua hai Jo bhavnao ko vyakt kar raha hai.
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Sunita Agarwal
Nice
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रमेश मेहंदीरत्ता
अवसाद क्या क्या नही करवाता,ज़रा सा खुलने से कहानी लाइफ की बदल गई,हम खुद अपनी कहानी लिखते हैं {ज़रा सा तारतम्य टूटा पर अंत मे जुड़ गया,}
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