सपने और अपने

आकाश सिंह

सपने और अपने
(4)
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सारांश

हर वक़्त बक-बक करने वाली अवनि आज चुप थी हमेशा आँखो में चाँद सी चमक की जगह आज आँसुओं ने ले ली थी थोड़े अपने पापा थोड़ा माँ और सहेलियों के बाद बचे सारे आँसुओं पर राहुल का नाम लिखा था जाने का दुःख एक ...
Veena Jha
कहानी अधूरी लगी....
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