सजा

सिद्धार्थ अरोड़ा

सजा
(366)
पाठक संख्या − 18855
पढ़िए

सारांश

रात का सन्नाटा! हाथ में ब्लेड! कमरे में अँधेरा! राधा बुत बनी कई मिनट तक खड़ी रही। कमरा जाना पहचाना होकर भी अजनबी लगने लगा। सारा गाँव सोया पड़ा था। ‘घर से भागने वाली लड़कियों को ट्रक वाले उठा के ले जाते ...
Sonu Kumar Gupta
आज भी ये वाक़या कही न कही सच हो रहा है।।। बहुत ही अच्छी सज़ा दी है अपने चाचा को इस हिम्मत को 5 स्टार.
Pappu Dubey
Aise logo ko bich raste me nanga korke zinda jala dena chihiye story Acha hai
डॉ. इला अग्रवाल
ufffff dardnaak ghatna pr adamy sahas ka parichay nayika ka
Jaiveer Singh Poonia
कहानी अच्छी है लेकिन अधूरी है धन्यवाद
madhu agnihotri
वाह कमाल का लिख दिया आपने। पहले कहानी जितनी मार्मिक लग रही थी पर अंत ने दुख को खुशी में बदल दिया। अपने किस हद तक कमीने होते हैं ये सत्य उजागर करती कहानी। साधुवाद लेखक जी को।👌🙏
Kanta Asopa
rakshk hi agar betiya ban jaye to ladki ko bada hona hi padta hai
Dani(दानि) Israr(इसरार)
कितनी मार्मिकता है इस रचना में😥
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.