सजा

सिद्धार्थ अरोड़ा

सजा
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सारांश

रात का सन्नाटा! हाथ में ब्लेड! कमरे में अँधेरा! राधा बुत बनी कई मिनट तक खड़ी रही। कमरा जाना पहचाना होकर भी अजनबी लगने लगा। सारा गाँव सोया पड़ा था। ‘घर से भागने वाली लड़कियों को ट्रक वाले उठा के ले जाते ...
Nandini Singh
सुन्दर रचना.......
नीता राठौर
एक भोली नादान बच्ची किस तरह से बड़ी कर दी गई और ये करनेवाले गैर नहीं अपने ही थे। ये अपने इतने लोलुप क्यों होते हैं, इनकी सज़ा यही होनी चाहिए। बढ़िया रचना।
Preeti Chauhan
इसी तरह की सजा का हकदार था वो
संतोष सुधाकर
संवेदनशील विषय पर अच्छी शैली में लिखी कहानी 👌👍
Nandkishor Kharche
तडफ तडफ के मारना चाहीये ऐसे हरामीयोंको
Jitendra
दिल छू लिया
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