सच्ची कहानी

शुभम सिंह

सच्ची कहानी
(35)
पाठक संख्या − 188
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सारांश

एक छोटी सी कहानी प्रस्तुत करना चाहता हु आप सभी के बीच-👱‍♂ ह तो बात कुछ इस तरह थी दोस्तों,एक छोटा परिवार था,😀उस परिवार में एक औरत उसके दो बच्चे,पति और उसकी साँस थी,😦 वो औरत अपने माइके जा रही ...
Uma Vaishnav
बहुत ही अच्छी सीख देती हैं... ये कहानी..... मानवता से बढ़कर कोई धर्म नहीं है
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Neha.( Smile forever N)
बहुत बहुत अच्छी कहानी है और आपकी माँ बहुत अच्छी है जिन्होंने धर्म पर नहीं बल्कि उस बच्चे की भूख को देखा और समझा वो मासूम बच्चा था जिसे ये तक नहीं पता वो किस धर्म से है! अपनी माँ के लिए 👌👌
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गजेन्द्र भट्ट
कहानी की नायिका आपकी माँ को, उनकी सोच को, उनके साहस को नमन करता हूँ। सुन्दर प्रस्तुति आपकी!
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Sonali Sharma//☆SONA//
यह कहानी सच्ची है और आपने इसे लिख कर एक संदेश दिया है...अच्छा लगा लेकिन खुशी तब हुई जब आपने दोनो औरतो के बारे मे भी बताया ... अपनो की गलतियो को भी उजागर किया। बहुत खूब।👏👏👏
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मंजुबाला
परिस्थितियां जात पात नही देखती
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Shobhna Goyal
बहुत ही अच्छा मुद्दा उठाया है आपने इस घटना के माध्यम से ।देश को अभी हिन्दू मुस्लिम एकता की ही आवश्यकता है । तभी हम इन तुच्छ बातों से ऊपर उठकर देश के विकास में भागीदार हो सकते है।
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Meera Sajwan
ज़ज्बात हिन्दू या मुस्लिम नहीं होते ये तो वो भाव होते हैं जो आपके मन की गहराइयों से निकलते हैं।ब
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Vijaykant Verma
wah..💐💐
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