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“ मम्मी, मुझे नहीं जाना खेलने | मैं नहीं जाऊंगी |” – सुनीता ने रुआँसी-सी होते हुए अपनी माँ से कहा | “ तो अपने पिता जी से कह | मुझे नहीं पड़ना तुम्हारे झमेले में |” – कोमल ने कहा | “ मुझे पापा से ...

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लेखक के बारे में

प्रकाशित पुस्तकें – 13 ( हिंदी और पंजाबी में कविता, कहानी और समीक्षा पर ); ईनाम- विश्व हिंदी सचिवालय मारीशस द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय हिंदी कहानी प्रतियोगिता में सौ डॉलर का सांत्वना पुरस्कार; जन्म तिथि - 23/10/1976; शिक्षा – एम. ए. हिंदी, इतिहास, ज्ञानी, बी.एड., उर्दू में सर्टिफिकेट कोर्स, हिंदी में नेट क्वालीफाइड; कार्यक्षेत्र – अध्यापन, लेक्चरर हिंदी ( स्कूल कैडर ); पता – गाँव व डाक – मसीतां, डबवाली, सिरसा ( हरियाणा ) ; Mo. - 87085-46183 Email - dilbagvirk23@gmail.com मेरा कहानी-संग्रह यहाँ उपलब्ध है - https://www.amazon.in/dp/9386027992/

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    20 फ़रवरी 2019
    मित्रवर श्री दिलबाग सिंह विर्क जी, बहुत-बहुत बधाई तथा साधुवाद।बहुत ही गम्भीर विषय पर आपने गहराई से विचार करते हुए खेलों में उनके पुरूष साथी खिलाडियों अथवा संरक्षक कोच द्वारा बच्चियों के साथ की जाने वाली ज्यादतियों को बहुत ही सहज-सरल तरीके से उजागर किया है।कोई-कोई लङकी ही अनेक दबाओं,प्रलोभनों से उबर कर ऐसे दुष्ट पुरूषों का मुकाबला कर पाती हैं।आपने बहुत ही ज्वलन्त समस्या पर सबका ध्यान आकर्षित करने का सार्थक प्रयास किया है। अपने देश-समाज के प्रति आपकी चिंता,जागरूकता तथा सावधानी के लिए आपको धन्यवाद और बधाई।
  • author
    महिमा श्री
    06 नवम्बर 2017
    प्रेरक कहानी है। आज के वातावरण में कैसे अपनी बच्चियों को आगे बढ़ने के लिए हौसला देना चाहिए, समस्या से घबरा कर बेटी को घर बैठाने के बजाए उसे हिम्मत के साथ आगे बढने का सम्बल मिलना चाहिए। संदेश देती कहानी के लिए बधाई
  • author
    Endless
    01 अप्रैल 2018
    esi ghatnao ka majbooti se hi samna karna chahiye
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    20 फ़रवरी 2019
    मित्रवर श्री दिलबाग सिंह विर्क जी, बहुत-बहुत बधाई तथा साधुवाद।बहुत ही गम्भीर विषय पर आपने गहराई से विचार करते हुए खेलों में उनके पुरूष साथी खिलाडियों अथवा संरक्षक कोच द्वारा बच्चियों के साथ की जाने वाली ज्यादतियों को बहुत ही सहज-सरल तरीके से उजागर किया है।कोई-कोई लङकी ही अनेक दबाओं,प्रलोभनों से उबर कर ऐसे दुष्ट पुरूषों का मुकाबला कर पाती हैं।आपने बहुत ही ज्वलन्त समस्या पर सबका ध्यान आकर्षित करने का सार्थक प्रयास किया है। अपने देश-समाज के प्रति आपकी चिंता,जागरूकता तथा सावधानी के लिए आपको धन्यवाद और बधाई।
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    महिमा श्री
    06 नवम्बर 2017
    प्रेरक कहानी है। आज के वातावरण में कैसे अपनी बच्चियों को आगे बढ़ने के लिए हौसला देना चाहिए, समस्या से घबरा कर बेटी को घर बैठाने के बजाए उसे हिम्मत के साथ आगे बढने का सम्बल मिलना चाहिए। संदेश देती कहानी के लिए बधाई
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    Endless
    01 अप्रैल 2018
    esi ghatnao ka majbooti se hi samna karna chahiye