संजना

डॉ. सरला सिंह

संजना
(114)
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सारांश

"दीदी कोई काम हो तो बताना ।" एक दुबली ,पतली साधारण सी महिला सामने खड़ी थी ।उसके चेहरे पर मुस्कान थी, उदासी का कोई नामोनिशान तक न था । अरे कहाँ थी संजना कब से मैं तुम्हें ढूँढ़ रही थी । " क्या करूँ दीदी ...
Sumit Hindu
सूंदर रचना
Sudhir Kumar Sharma
अद्भुत प्रेरक
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Meena Bhatt.
सरला जी आप की नायिका, एक माँ है न?इसीलिए वह धैर्य मान, सेहन शिल, प्रशंसनीय है बहुत ही अच्छी रचना।सधन्यवाद।
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Shilu Meena
Very good story.
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Harshit Singh
very good story.
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Savita Bhatt
very good story.
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डा. अरुणा कपूर
बहुत मार्मिक रचना।
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r.goldenink
nice...
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