संजना

डॉ. सरला सिंह

संजना
(119)
पाठक संख्या − 9345
पढ़िए

सारांश

"दीदी कोई काम हो तो बताना ।" एक दुबली ,पतली साधारण सी महिला सामने खड़ी थी ।उसके चेहरे पर मुस्कान थी, उदासी का कोई नामोनिशान तक न था । अरे कहाँ थी संजना कब से मैं तुम्हें ढूँढ़ रही थी । " क्या करूँ दीदी ...
Pushpander Jain
बेहतरीन जी
Jyoti Agarwal
very emotional and true story.
रिप्लाय
Sumit Ramawat
सूंदर रचना
Sudhir Kumar Sharma
अद्भुत प्रेरक
रिप्लाय
Meena Bhatt.
सरला जी आप की नायिका, एक माँ है न?इसीलिए वह धैर्य मान, सेहन शिल, प्रशंसनीय है बहुत ही अच्छी रचना।सधन्यवाद।
रिप्लाय
Shilu Meena
Very good story.
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.