संक्रांति काल - पाषाण युगीन गाथा 3

और्व विशाल

संक्रांति काल - पाषाण युगीन गाथा 3
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सारांश

शुरू में धारा को भय लगता था अम्बी के साहस से ,मगर धीरे धीरे उसे गर्व होने लगा अपनी उत्पत्ति पर ।अब बस वो अम्बी के योग्य पुरुष की तलाश कर रही थी पर शायद अभी तक उनके वन पर दुसरे गुफापुरुषों की नजर नहीं पडी थी ।
Thakur Singh
Jadaung ka kirdar jodkar aapne kahani ki rochakta bdha di
रमेश तिवारी लल्लन गुलालपुरी
Nice हमारी भी रचनाओं का अवलोकन करे
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Ramniwas Bishnoi
अति सुंदर
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पल्लवी राय
बहुत सुंदर विषय और कहानी👌
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रविन्द्र
अच्छी कल्पना ।सम्भवतः मनुष्य के सामाजिक और पारिवारिक होने की कथा कुछ ऐसी ही होगी।सुंदर रचना।।
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योगेश
excellent
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