श्रीकृष्ण आये थे

रचना व्यास

श्रीकृष्ण आये थे
(263)
पाठक संख्या − 12342
पढ़िए

सारांश

सिर दर्द से फटा जा रहा था। करवटें बदलते- बदलते रात एक बजे नींद आई। सुबह तबियत कुछ हल्की थी। कमलकांतजी ने सोचा प्रकृति ने ये रात को नींद की व्यवस्था न बनाई होती तो इंसान पागल ही हो जाता। चाय की तलब ...
Ajit
Uttam rachna Jeevan ka sabak sikhati kahani
puneeta
bahut achhi rachana hai
नैना साहू
बहुत सुन्दर प्रस्तुति
Aradhya
उत्कृष्ट रचना
Prabha Rawat
कहानी अति सुन्दर दिल को छूने बाली।
Archana Varshney
बहुत सुंदर
rachna
अति उत्तम
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.