शौचक्रीड़ा

गौरव कुमार

शौचक्रीड़ा
(25)
पाठक संख्या − 1436
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सारांश

सब के हाथ मे एक एक लोटा हुआ करता था, उस समय तो पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतल भी नही हुआ करती थी। किसी का लोटा नया तो किसी का चिपटा, किसी किसी लोटे का पेंदा गोल भी हुआ करता, जो शौचनिवृति के बाद लट्टू जैसा नचाने के काम आता। खेल का खेल और दोस्तों के निपटारा करके आने तक का टाइम पास।
Sachin Panwar
जब हम छोटे थे गाँव मे रहते थे, हम बच्चो को समूह शौच क्रीड़ा करने खेतों में जाया करता था।। ☺
प्रदीप दरक
हा हा हा
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अनुराग
बहुत ही शौचनीय विषय है😀😀
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nidhi Bansal
sorry pura nhi pd payi.himmat nhi hui poora pdne ki.star isliye ki aapne bhi bht himmat kr k likha h is subject pr
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Manjoo R Misra
पढ़कर बदबू महसूस होने लगी।
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अभिलाष दत्ता
मजेदार संस्मरण
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निशान्त
जो भी था मज़ेदार था। शौच आने की सूचना देने वाली उद्घोषक वायु क्रीड़ा पर भी एक संस्मरण बनता है।
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ashutosh kr sharma
शौच क्रीडा से एक बाकया (उन बहुतो मे) मुझे भी याद आया :::::::::::: एक बार एक ब्यक्ति रोड किनारे जो ढलान होता है, उसपर मजे से शौच निःशरण मे मग्न था, वो भी एक बनमिचाय के पौधा को पकङकर कि कही मै गिर न जाऊ लुढक कर पर हुआ वही जिसका डर था। वह लुढक कर गिर ही गया :::::::::::::::क्यो गिर गया? ?????सोचो, अनुमान लगाया जा सकता है कैसा अनुभव हुआ होगा उसे! !!!!!!!!!!!!!!
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