शौचक्रीड़ा

Gaurav Kumar 'वशिष्ठ'

शौचक्रीड़ा
(74)
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सारांश

सब के हाथ मे एक एक लोटा हुआ करता था, उस समय तो पानी और कोल्ड ड्रिंक की बोतल भी नही हुआ करती थी। किसी का लोटा नया तो किसी का चिपटा, किसी किसी लोटे का पेंदा गोल भी हुआ करता, जो शौचनिवृति के बाद लट्टू जैसा नचाने के काम आता। खेल का खेल और दोस्तों के निपटारा करके आने तक का टाइम पास।
Satyam gupta
Haha
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डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा
गज्जब का व्यंग्य ।
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Varun Sharma
संस्मरण के तौर पर शानदार.. लेकिन ये संस्मरण कहीं आत्म संस्मरण तो नहीं है चिंटू जी..?
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R.k. Dwivedi
बचपन की याद ताजा हो गई
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Jitendra Pandey
good
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Abhishek Chaubey
सर, लेख में पूर्ण वास्तविकता है। awsm,superb
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Sulabh Yadav
मस्त है जलेबी वाले में मजा आ गया
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Meena
🤣🤣🤣🤣
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अभिषेक हाड़ा
hahahaha, hit hai bhai, iska aanand ganv wake abhi bhi lete hai
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Rinku Gupta
गज़ब
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