शेफाली चली गई

प्रियदर्शन

शेफाली चली गई
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सारांश

`हलो, मैं शेफाली।` आवाज़ की खनक जानी-पहचानी थी। मिलने का समय भी तय था। मिलने की जगह भी तुम्हीं ने बताई थी। फिर भी तुम स्तब्ध से खड़े रहे- बिल्कुल जड़वत। क्या इसलिए कि शेफाली वैसी नहीं थी जैसी तुमने ...
sugandh yadav
bahut hi acchi... nhi janti hu ki kyu hota hai aisa.. is dard ko mujhse behtar kon janega...???
Tushita Singh
काफी अच्छी कहानी।
Jyoti Chaube
nice story,pataa nahi q log,aaj bhi achhi sirat ki jagah achhe surat ko tarjih dete hai
डॉ. इला अग्रवाल
dukh takleef aansu beinteha dard😢😢😢 aur kya kahun... q h sirf ladkiyon ki aisi niyati... sanvli,sharirik roop se kuch kmtr pr baki behtr se behtarin ladkiyon ki b aisi hi niyati...AKHIR KYON???
रिंकेश
मेरी कहानी से भी शैफाली जा रही है..
सीमा जैन
बहुत सुन्दर कहानी और लिखने की कला उससे भी अधिक उम्दा।
Mahima Tiwari
Mai bhi bht kuchh Shefali ki tarah hi hoon.... kaabil aur km khubsurat.
Nidhi Vyas
superb....story bhi aur likhne ka andaz bhi...bahut sundar
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