शेफाली चली गई

प्रियदर्शन

शेफाली चली गई
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सारांश

`हलो, मैं शेफाली।`आवाज़ की खनक जानी-पहचानी थी।मिलने का समय भी तय था।मिलने की जगह भी तुम्हीं ने बताई थी।फिर भी तुम स्तब्ध से खड़े रहे- बिल्कुल जड़वत।क्या इसलिए कि शेफाली वैसी नहीं थी जैसी तुमने कल्पना
सीमा जैन
बहुत सुन्दर कहानी और लिखने की कला उससे भी अधिक उम्दा।
Mahima Tiwari
Mai bhi bht kuchh Shefali ki tarah hi hoon.... kaabil aur km khubsurat.
Nidhi Vyas
superb....story bhi aur likhne ka andaz bhi...bahut sundar
Amit Chauhan
truly described the feeling of the girl who is not fit accordingto the so called standard set by the society to being Beautiful
Rachana Wadekar
Kya khub behtareen likha hai.jo lahza istemaal Kiya hai vo to bas bhai waah.
prem kumar
बहुत सुन्दर। मेरी कहानी, टीन का लोटा पढ़ें और टिप्पणी दें, आलोचनाओं का मैं स्वागत करूँगा।
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