शुद्रों का अहसान

विनोद सिल्ला विनोद सिल्ला

शुद्रों का अहसान
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सारांश

शुद्रों का अहसान मानना चाहिए शुद्रों का अहसान भारत में लेकिन होता है शुद्रों का अपमान भारत में महल-मकान और प्रतिष्ठान बनाए शुद्रों ने पशु-पालन, खेत-खलिहान कमाए शुद्रों ने विसार दिया शुद्रों का, सम्मान भारत में नहर - बांध बना कर, है सींचा भारत को उन्नति के सुनहरी पथ पे खींचा भारत को भुला दिया है शुद्रों का योगदान भारत में ज्ञान के प्रतीक हमीं, देखो दर्ज इतिहास में चरखे वाले हक खागए मरणव्रत उपवास में चलता है यहाँ, शुद्रों का विधान भारत में मानव-मानव है एक-समान भुलाया
rahul kumar
आपने बिलकुल सही बाते लिखे हैं
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Meena Rani
यथार्थ चित्रण
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और्व विशाल
वाह ,अनुपम लेखनी
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Rajeshwar Das
ओजपूर्ण कविता
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