शाम की सब्जी

डा.लक्ष्मी शर्मा

शाम की सब्जी
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सारांश

"आज फिर मटर-मलाई! मुझे नहीं खानी ये सब्जी। रोज गोभी, रोज मटर ,वो ही दाल, वो ही चावल.. कुछ अच्छा नहीं बना सकती तुम।" कविष ने भुनभुनाते हुए थाली सरका दी। "बेटा, मैं क्या बनाऊँ फिर? तुम मेथी-पालक भी तो ...
neeta
samaj ke ameer aur gareeb ka antar darshati ek yatharth kahani
Shashi Mishra
दोनों ही वर्गों की एक ही समस्या पर भावनाऐं अलग हैं। बहुत खूब।
Indu Kapoor
bachon Ko swayam nhi pata ki unhe kya chahiye. ghar ghar ki Roz ki kahani.achhi kahani
Hem Lata Tiwari
कहानी नहीं यथार्थ है ।अनोखी रचना के लिए बधाई।
Garima Singh
'have' and 'have not'....bahut achcha likha hai !
Geeta Ved
nice..ye hr ghar ki khani hai
Aarya Arya
जिसको सब मिलता है उसे कदर नही और जिसे कदर है उसे मिलता नही ,,,अच्छा संदेश अच्छी कहानी
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