शहर में मैं आई तो जवानी नई थी

पवन तिवारी

शहर में मैं आई तो जवानी नई थी
(38)
पाठक संख्या − 901
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सारांश

शहर में मैं आई तो जवानी नई थी। मोहब्बत की पहली कहानी नई थी। बर्बाद हो जाऊंगी ना पता था। चढ़ी यह जो मुझ पर खुमारी नई थी। बड़ी नाजों से मेरी इज्जत उतारा। धोखे की प्यारी कहानी नई थी। बहुत रोई - ...
Dinesh Sharma
सिर्फ एक ही शब्द हो सकता है-अद्धभुत!!
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Mohit singh bhadoriya
achha hai
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Hansraj Saini
लाजवाब
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Sunil Shukla
बहुत ऊंची बात,बड़ी साफगोई से लिखा है, आपने 🌼🌼🌼🌼 बेहतरीन रचना
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Sikandar Vadia
bahut bhetrin gazal
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Aman Yadav
अविस्मरणीय गजल हैं श्रीमान
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Pawan Giri
प्रभावकारी रचना
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