शहतूत का पेड़

अनिता तोमर

शहतूत का पेड़
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पाठक संख्या − 119
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सारांश

बाल्यावस्था का अबोध मन भावनाओं की गहराई को जितना अधिक समझता है शायद उतना हम परिपक्व होते हुए भी समझ नहीं पाते।
Saroj Singh
बहुत सुंदर कहानी दिल को छू लेने वाली
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ध्रुव कश्यप
उत्तम..भावनाओं से भरी।
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Shourabh Prabhat
कथानक के भावनात्मक पहलुओं को बहुत ही खूबसूरती से पेश किया है आपने... सस्नेह अभिनंदन
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Dr. Vishal Chauhan
अनीता जी बहुत ही भावुकता से युक्त, दिल को छू लेने वाली रचना लिखी आपने 👍👍👍
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✨Aanchal Soni✨
aadradiya 🙏🏻🙏🏻apki rachna hriday shparshi wa marmik h*****bhut achhi kahani h...sahtut ka bahon Ko faila k intazzr ka wrdan WA budhiya k mayike se la kr us sahtut k ped ko Lagana....bhut khub👌🏼👌🏼👌🏼
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Vijaykant Verma
बहुत सुंदर कहानी..! एक जवलंत प्रश्न-क्यों लोग वृद्ध लोगों का खयाल नही करते..??💐💐
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SURYA RAWAT
बहुत ही सुंदर , उतारा है आपने चरित्रों को अनीता जी 😊👌
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ms Kamaal
Good
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Rajni Braj gopal
बहुत सानदार ,आदमी को किसी भी हालात में धैर को बनाऐ रखना चाहिऐ
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Asha Shukla
बेहद खूबसूरत और संवेदनशील व मार्मिक कहानी।👌👌👌💐💐💐💐 जितनी भी तारीफ की जाए उतनी ही कम है👌👌👌👌👌
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