शर्त

महिमा (श्रीवास्तव) वर्मा

शर्त
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सारांश

मोबाइल पर बात ख़त्म करते हुए अबीर ने मानसी को आवाज़ दी. सुनो ! अब जल्दी से बताओ, कब चलोगी ? मैं बात करके उनसे मिलने का वक़्त तय कर लेता हूँ . "अबीर ने कहा . नन्हें को नहलाने में व्यस्त मानसी ने पूछा " ...
Sunil Kumar Tewari
विवाह के पश्चात मानसी के आदर्श ध्वस्त हो गये. फिर विवाह यदि शर्तों व विशेष प्रतिबद्धताओं पर हो वह क्या उचित है ?
Mithlesh Shrivastava
अच्छी और शिक्षाप्रद कहानी, धन्यवाद उस कहानीकार को।
Rakesh Pandey
Saty ke kareeb kathanak
durganarayan singh
काल्पनिक आदर्शवाद से इतर यथार्थवाद को रेखांकित करती दमदार रचना।
satish kumat
मानव मन कोई नहीं जान पाया
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