शराब की दुकान

मुंशी प्रेमचंद

शराब की दुकान
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सारांश

कांग्रेस कमेटी में यह सवाल पेश था-शराब और ताड़ी की दूकानों पर कौन धरना देने जाय? कमेटी के पच्चीस मेम्बर सिर झुकाये बैठे थे; पर किसी के मुँह से बात न निकलती थी। मुआमला बड़ा नाजुक था। पुलिस के हाथों ...
ashwini jaiswal
मुंशी जी की बात कहने की अदा ही निराली है
Mukesh Verma
आजादी से पहले शराब बन्दी पर जोर देते थे।अब सरकार खुद ठेका तो देती ही है ।प्रति वर्ष 40%बिक्री बढाने पर जोर देती है।अन्यथा ठेका दूसरे व्यक्ति को दे देती है। प्रेम चंद्र जी की उत्तम रचना।
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नशाखोरी के खिलाफ धरना वापस सत्याग्रह।
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सजीव चित्रण|
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