शक की आग

उपासना सियाग

शक की आग
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सारांश

"बाय माँ "......अपने छोटे-छोटे हाथ हिलाता हुआ उदय ऑटो में बैठ कर स्कूल चला गया तो मैंने राहत की साँस ली .....उफ़ ! सुबह-सुबह की भागदौड को एक बार राहत सी मिलती है जब बच्चों को स्कूल भेज दिया जाता ...
Fahmina Abidi
aise me dr se consult karna chahiye jitna jldi ho sake ni to zindgi bhar ka pachtawa rah jata h samay rahte ilaaj ho jaye to wo Banda bi apni life thik tarah enjoy kar sake
Jaiveer Singh Poonia
कहानी में बहुत सुन्दर ढंग से शक के बारे प्रस्तुति की गई है बधाई के पात्र हैं
Vijay Kumar
बहुत ही बेहतरीन रचना... शायद इसलिए कहते है कि शक एक सुखी गृहस्थी जीवन को बर्बाद कर देती है... आज भी समाज ऎसे मामलों में चुप्पी साध लेता है जो कि निश्चित रूप से दुखद है...
Jyoti Rishi
bahut hi emotional rachna
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