व्यथा एक महिला कुम्हार की

Mamta Singh Devaa

व्यथा एक महिला कुम्हार की
(43)
पाठक संख्या − 974
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सारांश

एक महिला कुम्हार की व्यथा और हौसले की कहानी ।
सतीश पोकळे
Great 🙏... मिट्टी के मटके का ठंडा पानी और कुल्हड की गरम चाय का मजा ही कुछ और है मॅडम... 👍
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rashmi srivastava
Salute..
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Manisha Verma
बहुत खूब
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Sanjay Raghunath Sonawane
बहुत अच्छा लेखन!👍👌💐
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Satish Bhawsar
ममताजी आपके हौसले को सलाम पुरुष कठिनाइयों से लङकर जीतता आप स्त्री हैं आपने हंसकर जीता
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Shalini Suryawanshi
super
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Kamini Dubey
Zajbe ko salam
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Manu Prabhakar
ममताजी आपने पत्थर उछाल ही दिया। अब आप औरतों की प्रेरणा हैं ।
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Vimal Shukla
बहुत सुन्दर साहसपूर्ण व प्रेरणास्पद
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