व्यथा एक महिला कुम्हार की

Mamta Singh Devaa

व्यथा एक महिला कुम्हार की
(46)
पाठक संख्या − 1268
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सारांश

एक महिला कुम्हार की व्यथा और हौसले की कहानी ।
Ashok Prajapati
कायदे से आप दोनों कला-मिट्टी और साहित्य के धनी हैं । सोच को साकार रूप देने की अद्भुत क्षमता भी है । आत्मकथात्मक शैली काबिले तारीफ हैऔर रचना असंख्य लोगों के लिए उत्प्रेरक है । बधाई ।
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सतीश पोकळे
Great 🙏... मिट्टी के मटके का ठंडा पानी और कुल्हड की गरम चाय का मजा ही कुछ और है मॅडम... 👍
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rashmi srivastava
Salute..
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Manisha
बहुत खूब
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Sanjay Raghunath Sonawane-sundarsut
बहुत अच्छा लेखन!👍👌💐
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Satish Bhawsar
ममताजी आपके हौसले को सलाम पुरुष कठिनाइयों से लङकर जीतता आप स्त्री हैं आपने हंसकर जीता
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Shalini Suryawanshi
super
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Kamini Dubey
Zajbe ko salam
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Manu Prabhakar
ममताजी आपने पत्थर उछाल ही दिया। अब आप औरतों की प्रेरणा हैं ।
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