व्यंग्य-मीटिंग का मतलब

अरविन्द कुमार खेड़े

व्यंग्य-मीटिंग का मतलब
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सारांश

दो-तीन दिन की छुट्टियां बीताकर देर रात को यह सोचकर लौटा था कि मैं तो सरकारी मुलाज़िम हूँ. कहीं हड्डी-तोड़ काम पर जाना तो है नहीं. सुबह देर तक सोना है और सफ़र की थकान मिटाना है.लेकिन अलसुबह ही फोन घनघना ...
Gaurav Yadav
बजा के रख दी
Afsana Arzoo
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