वो जो एक फ़िल्म थी .. घरौंदा

डॉ. राजीव श्रीवास्तव

वो जो एक फ़िल्म थी .. घरौंदा
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सारांश

यूँ तो पाँव के नीचे धरती और सर के ऊपर आकाश तो सब के संग रहता है फिर भी हर किसी के भीतर एक अपना स्वयं का ऐसा टुकड़ा सहेजने की चाह सदा होती है जहाँ वो अपने हिस्से का संसार रचा-बसा कर उसे अपना ‘घरौंदा’ ...
Rajat
good story it remind my childhood time
Pankaj Kumar
bahut dino ke baad ye kahani padi hai . very nice.
Kumar Prashant
सर, आपने तो झकझोर दिया, बेहतरीन वर्णन।
Monika Kukreja
अब ऐसी फिल्में नही बनती 😌😌
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