वो चल कर आ नहीं सकता

अशोक रावत

वो चल कर आ नहीं सकता
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सारांश

वो ऐसा ख़्वाब है जिसको कभी मैं पा नही सकता, मगर यह बात अपने दिल को मैं समझा नहीं सकता. मुझे बहला नहीं सकता नई तहज़ीब का जादू, मेरे बच्चे कभी मुझको शहर लौटा नहीं सकता. तुझे मैं किस लिए फिर आसमाँ का ...
Sushma Rasal
खूपच भारी
Manish Shaw
बहुत ही बढ़िया
Raj Bhalla
बहुत उम्दा ग़ज़ल है।
शुभम पंथ
अच्छी कविता
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