वो गलियां

Sunil Nishad

वो  गलियां
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सारांश

कुछ सपने कुछ यादें लियें मन में उम्मीदों  के ख्वाब सजाये निकले थे ,उन गलियों से  जिन गलियों में कभी बचपन गुजरा आंखें नम हो जाती है, जब याद आती है वो गलियां।।। जिनके संग कभी खेला करते थे हम उन गलियों ...
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