वो कौन थी ?

नितिन श्रीवास्तव

वो कौन थी ?
(450)
पाठक संख्या − 49734
पढ़िए

सारांश

हम अपने ड्राइंग रूम में बैठे टी वी देख रहे थे। श्रीमतीजी ने कहा 'बहुत रात हो गयी है मैं सोने जा रही हूँ। चलो तुम लोग भी टी वी बंद करो और सोने चलो। ' इतना कह कर वो उठ के बैडरूम में चली गयी। मैंने एक निगाह घड़ी पर डाली , 12 बज कर 30  मिनट हो चुके थे, मैंने बेटे से बैडरूम में चलने को बोला और खुद टी वी ऑफ करके ड्राइंग रूम को थोड़ा व्यवस्थित करने लगा। मेरा बेटा बैडरूम के दरवाजे तक गया थोड़ा रुका फिर वापस आ गया। वो मेरे पास आ कर बोला , 'पापा आप भी चलो मैं अकेला नहीं जाऊंगा मुझे डर लग रहा है। ' मैंने उसे कहा 'बेटा डरने की क्या बात है, मम्मी तो रूम में ही हैं। ' पर वो जाने को तैयार नहीं हुआ तो मैं उसे लेकर कमरे में आया, कमरे में अँधेरा था और मेरी पत्नी बेड पर सिर झुका कर बैठी थी। मैंने उसे आवाज दी , 'क्या हुआ ऐसे क्यों बैठी हो और लाइट क्यों नहीं जलाई ?' जब उसकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया तो मैं बेटे को पीछे छोड़ कर उसके पास पहुँच गया और उसका चेहरा अपने हाथ में लिया तो चेहरा पूरी तरह गीला था ऐसा लगता था कि वो बहुत देर से रो रही हो और आंसुओं से चेहरा गीला हो गया हो। इससे पहले की मैं कुछ और बोलता पीछे से आवाज़ आयी , 'क्या बड़बड़ा रहे हो अँधेरे में, लाइट तो ऑन कर लेते ?' मैंने हड़बड़ा कर पीछे देखा तो श्रीमती जी अटैच्ड बाथरूम से निकल कर लाइट जला चुकी थीं। मैं आश्चर्य से उसे देख रहा था और मेरा बेटा डरा हुआ सा मुझे देख रहा था। मेरी पत्नी ने दोबारा जोर से पूछा , 'क्या हुआ, ऐसे क्या देख रहे हो और हाथ में क्या है ?' अब मुझे भी होश आया और मैंने अपने हाथों को देखा, हाथों को को देख कर ऐसा लगता था कि जैसे मैंने दोनों हाथों में कुछ उठा रखा हो पर हाथ खाली थे लेकिन हाथों में गीलापन अब भी था।
मधुलिका साहू
तो क्या कार महिला का रूप धारण करके रोती थी?
Deepti Hooda
khani jis liye bnayi h vo comments dekhkr PTA chla ki kisi Ko smj hi Ni aai pdne vale itne intelligent ho gye hahaha thoda apna dimahk bi lgavo sb writer hi btayga
रिप्लाय
Gulshan Mahawar
भाई क्या कहानी रची है तुमने सोचा नहीं था की हमारी चीज़े भी हमे डरा कर अपना काम करवा सकती है। it's different.. अब से मुझे भी अपने घर की चीज़ों का और गाडी का ध्यान रखना पड़ेगा।
Vandana Kumar
maza aa gaya padhne mei, pahle to dar laga, lekin end mei sb smjh mei aa gaya. hume apni chizo ka uchit dhyaan rakhna chahiye nhi to kisi din wo khud hi apne kharab hone ka dhyaan itni darawni tarah se hume dilayengi😥😥
रिप्लाय
aman singh
nice story...starting se horror end pe comedy
Dinesh Pant
अच्छा प्रयास
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.