वो और तुम

Kumar durgesh Vikshipt *Vaishnav*

वो और तुम
(29)
पाठक संख्या − 109
पढ़िए

सारांश

"वो और तुम"                 # कुमार दुर्गेश "विक्षिप्त"# इक बात बता तू ही सही, तुझे चाहूँ या उसे भुलूं कहीं, जो दूर है उसे साथ लिये हूँ, तू पास है, फिर भी नहीं, वो ख्वाब है, या ख्याल है? याद ...
Archana Maheshwari
nice composition
रिप्लाय
मनीषी त्रिवेदी
उम्दा..!
रिप्लाय
arpana
behtareen👌👌
रिप्लाय
sandeep parihar
सेल्यूट you
रिप्लाय
Amit Kumar Soni
उम्दा रचना.
रिप्लाय
शरोवन
सुंदरम।
रिप्लाय
Satpal. Singh Jattan
kmaal ki poem h sir.very nice
रिप्लाय
रविंद्री चौधरी
सुन्दर से भी सुन्दर
रिप्लाय
योगेश
fantastic
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.