वो अल्हड़ सा

Deepti Arora

वो अल्हड़ सा
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पाठक संख्या − 11982
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सारांश

जनवरी 2018 की बात है। सुपर एक्सप्रेस एक लंबे हॉर्न के बाद अपना नियत स्थान छोड़ चुकी थी। गाड़ी अब धीरे धीरे आगे बढ़ रही थी। गाड़ी में काफी भीड़ होने की वजह से हमें बैठने की जगह भी नहीं मिल रही थी। हम ...
Suresh Thakur
very very nice
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Geeta Rajput
nice story mam.......ye story aage likhi ja sakti he
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Manisha Jain
good
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Niraj Agrawal
सचमुच एक अच्छी कहानी। कई बार किसी से सिर्फ बात करके ही काफी अच्छा महसूस होता है और बात न होने पर महसूस होता है जैसे कुछ miss हो रहा है।
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V.p. Rana
bhut acchi story dil khus ho gaya
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Wajid Qadri
Bhut dil chashb khani h Good
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Ajay Dang
Ati sunder
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JS Naphrary
Nice story
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Harish malviya
कहानी अच्छी लगी।
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