वैदिक और शास्त्रीय संस्कृत साहित्य में दृश्यमान पर्यावरण संवेदनशीलता

डाक्टर. चिलकमर्ति दुर्गाप्रसाद राव डाक्टर . काट्रगड्ड राजेन्द्र नाथ

वैदिक और शास्त्रीय संस्कृत साहित्य में दृश्यमान पर्यावरण संवेदनशीलता
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सारांश

कस्त्वं भो कविरस्मि तत्किमु सखे क्षीणो S स्यनाहारत : धिग्देशं गुणिनो S पि दुर्गतिरियम् देशं न मामेव धिक् | पाकार्थी क्षुधितो यदैव विदधे पाकाय बुद्धिं तदा ...
Pranjal Mishra
बहुत ही सार्थक रचना ।💐👌👌🙏
indu sharma
अतिशोभनं साधुवाद
Bably Sharma
आपने जीवन के यथार्थ को बहुत ही गहराईयों सहित वर्णन किया है। प्रणाम सर
Vandana Rastogi
श्रेष्ठ ।तीन तत्वों के प्रदूषित होने से शेष दोनो तत्व भी प्रभावित होगे अतः सभी तत्वों का संरक्षण आवश्यक है।
मदन मोहन समर
बहुत ही आवश्यक आलेख जो पूरी कसावट के साथ लिखा गया है।हार्दिक बधाई।
Shrinivas Kulkarni
😓🤔🤔🤔🙇🏼‍♂️💐
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